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सामाजिक न्याय ही सरोकार, वंचितों की पक्षधर सरकार

 भरतचन्द्र नायक

यह एक शास्वत सत्य है कि भारत की जीवन प्रणाली लोकतंत्री है। जिस लोकतंत्र के उदय के इतिहास में भारत को पीछे बताया जाता है वह विवादित और बहस का मुद्दा है। सच्चाई यही है कि भारत के लोक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्था अघोषित रूप से रची पची हैं यही राम राज्य की कल्पना है, जिसके पेरोकार इतिहास पुरूष के रूप में सराहे गये हैं। आजादी के बाद प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से लोकतंत्र की छाया में हमें अधिकार का कवच और कत्र्तव्य का नैतिक बोध कराया गया। ...

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पशुधन संवर्धन और दूध उत्पादन में लम्बी छलांग

  • सुनीता दुबे

पिछले 11 वर्ष के दौरान पशु-पालन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय-स्तर पर अपनी सशक्त उन्नति दर्ज करवायी है। प्रदेश ने न केवल दुग्ध उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि की है, बल्कि पशु-पालन, आहार, चिकित्सा, अनुसंधान, नस्ल-सुधार की अत्याधुनिक तकनीकों में भी अग्रणी बना है। प्रदेश में कुल 3 करोड़ 63 लाख पशु हैं। इनमें एक करोड़ 96 लाख गौ-वंशीय, 81 लाख भैंसवंशीय और 60 लाख बकरा-बकरी हैं। शासकीय प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों सहित शहरी क्षेत्रों में भी डेयरी उद्योग काफी उन्नति कर रहा है।...

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समाज के हर वर्ग का विकास, देश में अव्वल मध्यप्रदेश

  • संजय जैन

मध्यप्रदेश में बीते ग्यारह वर्ष आमजनों के विकास के रहे हैं, ऐसा विकास जो जन अपेक्षाओं के अनुरूप हो। प्रदेश में ऐसा विकास हुआ जिसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचा।...

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आई.टी. के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने नई नीति जारी

  •  राजेश पाण्डेय

सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिये राज्य शासन द्वारा पुरानी नीति का पुनरीक्षण कर नई आई.टी., आई.टी.ई.एस. एवं ई.एस.डी.एम. निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 जारी की गयी है। पूँजी निवेश एवं ब्याज अनुदान जो अभी 10 करोड़ तक निवेश करने वाली लघु एवं मध्यम इकाइयों को ही दिया जाता था, उसे अब 10 करोड़ से ऊपर निवेश करने वाली इकाइयों को भी दिया जायेगा।...

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धरती का श्रंगार ही नहीं रोजगार का साधन भी हैं मध्य प्रदेश के वन

  • सुनीता दुबे

मध्यप्रदेश की धरती का श्रंगार करने वाले वन उनके आस-पास रहने वाले गाँव वालों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का भी बहुत बड़ा साधन हैं।...

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आर्थिक क्रांति की संवाहक - प्रदेश की जनता

  • शिवराज सिंह चौहान

पूरे देश में 8 नवम्‍बर, 2016 को एक ऐतिहासिक फैसला हुआ। इस दिन ने सरकारों के कामकाज की शैली पर जन-मानस द्वारा जो प्रश्‍न उठाए जाते हैं उसे एक सार्थक उत्‍तर दिया है। अक्‍सर सरकारों पर ये आरोप लगते हैं कि वे कठोर निर्णय नहीं ले सकती और शक्तिशाली लोगों को नुकसान पहुँचाने वाले निर्णय लेने से डरती हैं। हमारे प्रधानमंत्री जी ने 8 दिसम्‍बर, 2016 से 500 और 1000 रूपये के नोटों को बन्‍द करने के साहसिक निर्णय से इस मिथक को तोड़ा है कि सरकारें दबाव में आकर कठोर निर्णय नहीं लेती हैं।...

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असाधारण राजनीतिज्ञ और जिंदादिल इंसान थे पटवाजी

  • शिवराज सिंह चौहान

 श्रद्धेय सुंदरलाल पटवा जी को मैंने 1974 के उपचुनाव में पहली बार देखा। उनके चेहरे पर तेज और वाणी में ओज था। उनके भाषण ने मुझे बहुत प्रभावित किया। पटवा जी कुशल संगठक, प्रभावी जननेता और अद्भुत वक्ता थे। उनकी भाषण शैली के सभी कायल थे। विधानसभा में जब वो बोलते थे तो पिन ड्राप साइलेंस हो जाता था।...

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तकनीकी शिक्षा सुविधाओं में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

  • राजेश पाण्डेय

राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प और कुशल नीतियों से प्रदेश में तकनीकी शिक्षण संस्थाओं की संख्या एवं प्रवेश क्षमता में प्रभावी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2005 की तुलना में पिछले वित्त वर्ष तक बी.ई. में लगभग पाँच सौ और डिप्लोमा पाठ्यक्रम में चार सौ प्रतिशत विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है।...

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शिल्पी, बुनकर, कारीगर उत्थान और प्रदेश के हस्तशिल्प-हथकरघा वस्त्रों को नयी पहचान

  • सुनीता दुबे

प्रचीन काल से ही भारत में कुटीर उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सहिष्णु भारत की संस्कृति में विदेशी शासकों के हस्तक्षेप ने इसको धूमिल तो किया, परंतु यह नष्ट नहीं हो पायी।...

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चिकित्सा शिक्षा में विस्तार और सुधारों से जनता को मिला बेहतर इलाज

  • आनंद मोहन गुप्ता

मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र का विस्तार पिछले 11 वर्ष में महत्वपूर्ण रहा है। जहाँ एक ओर अस्पतालों के हालात में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, वहीं चिकित्सा शिक्षा बेहतर हुई है...

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