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ग्वालियर के चायवाले, आनंद ने भी भरा राष्ट्रपति के लिए नामांकन

भोपाल | जब एक चायवाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो क्या एक चायवाला देश का राष्ट्रपति बनने का सपना नहीं देख सकता? ऐसा मानना है कि मध्य प्रदेश के रहने वाले आनंद सिंह कुशवाहा का। वह पेशे से चायवाले हैं और देश के राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचने की इच्छा रखते हैं। अपनी इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने चौथी बार देश के राष्ट्रपति बनने के लिए नामांकन भरा है। आनंद अब तक 20 बार चुनाव हार चुके हैं। जहां बीजेपी और कांग्रेस राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर अपने-अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं आनंद ने चौथी बार अपनी दावेदारी पेश कर दी है।

एमपी के ग्लावियर के रहने वाले आनंद सिंह कुशवाहा पेशे से चाय विक्रेता है और साल 1994 से अबतक चुनाव लड़े रहे हैं। वह राष्ट्रपति के अलावा उपराष्ट्रपति का भी चुनाव लड़ चुके हैं। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे कुशवाहा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि वह उत्तर प्रदेश के सांसदों और विधायकों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि पिछले के चुनावों में उन्हें ज्यादा वोट नहीं मिले, लेकिन इस बार मुझे भरोसा है कि मुझे समर्थन मिलेगा। राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए 50 वैध वोटर्स और कम से कम 50 बैकर्स की जरुरत होती है। कुशवाहा चुनाव लड़ने के लिए फंड की व्यवस्था अपनी रोजमर्रा की कमाई से कटौती करके बचाते हैं। इन पैसों को सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा करते हैं।

साल 2014 में आम चुनाव के दौरान जमा किए गए हलफनामे में आनंद सिंह ने बताया था कि उनके पास 5000 रुपए कैश और दस हजार रुपए कीमत की अचल संपत्ति है। सिंह बताते है कि वह प्रचार के लिए गाड़ी का खर्च नहीं उठा सकते हैं, इसलिए पैदल ही प्रचार करते हैं। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कुशवाहा को 376 वोट मिले थे।

पति-पत्नी ने भी भरा पर्चा

राष्ट्रपति चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा नोटिफिकेशन जारी करने के बाद कई लोग राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश कर चुके हैं। इससे पहले एक पति और पत्नी द्वारा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचन पर्चा भरने का मामला सामने आया था। पटेल दंपति ने निर्वाचन अधिकारी को बताया कि यदि उनमें से कोई एक राष्ट्रपति बन जाए और दूसरा उप-राष्ट्रपति बन जाए तो यह अच्छा रहेगा। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 28 जून तक चलेगी। नामों की छंटनी 29 जून को होगी। जिसके बाद 17 जुलाई को वोटिंग होगी और फिर 20 जुलाई को काउंटिंग की जाएगी।

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