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सरकारी राशन की कालाबाजारी में बड़ा नाम बन गया था अयाज, जबलपुर, रीवा से भी आता था गेहूं

भोपाल. करोंद मंडी में अयाज अली की विक्की ट्रेडर्स और जेडएम ट्रेडर्स से बरामद हुए कल्याणकारी योजना के गेहूं में सिर्फ भोपाल ही नहीं, जबलपुर, रीवा, होशंगाबाद, सीहोर और विदिशा की सोसाइटियों का गेहूं भी मिला है। इससे साफ होता है कि अयाज राशन के गेहूं की कालाबाजारी में बड़ा नाम हो गया था।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने करोंद मंडी के गोदामों की जांच कर इस कड़ी का भांडाफोड़ तो कर दिया, लेकिन इससे आगे गेहूं कहां जाता था? कहां सप्लाई होता था? इस कड़ी तक अभी भी नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों की मानें तो इस कड़ी में एक नहीं कई एेसे नाम सामने आएंगे जिनके उजागर होने से हड़कंप मच सकता है।

३६ में से २० डीडी बैंक ऑफ इंडिया के थे, मैनेजर ने खाद्य विभाग के अधिकारियों से ब्रांड कोड मांग कर सर्वर में डाला तो २० डीडी की डीटेल सामने खुलकर आ गई। ये नाम था ट्रांसपोर्टर खालिद का। इससे इतना तो साफ होता है कि ट्रांसपोर्टर ने ही बड़े स्तर पर डीडी बनवाकर सीधे नान से राशन उठाकर अयाज के यहां पहुंचवाया है। ३३ कल्याणकारी संस्थाओं की जांच में दो संस्थाएं ऐसी सामने आई हैं, जिनके संचालकों ने अपने बयानों में कबूल किया है कि जब संस्था के पास फंड का अभाव होता था। तब डीडी ट्रांसपोर्टर से बनवाए जाते थे। फंड आता था तो ट्रांसपोर्टर को चैक से पेमेंट कर दिया जाता था।

करोंद मंडी में पहुंचाए गए सरकारी गेहूं-चावल को वाहन से अनलोड करने में कितने हम्माल लगाए गए थे, इस पहलू पर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हम्मालों के बिना अनाज की अनलोडिंग नहीं हो सकती। इसलिए उनसे भी पूछताछ की जाएगी। जिन हम्मालों की भूमिका संदिग्ध होगी, उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा। उनका कहना है कि अनाज को गोदाम में पहुंचाने से लेकर सरकारी खाली बोरियां जलाने एवं उन्हें नष्ट करने में हम्मालों की भूमिका सामने आ रही है।

इस मामले में सोसाइटियां, गोदाम संचालक, ट्रांसपोर्टर के अलावा खाद्य विभाग के कुछ अधिकारी भी शक के घेरे में हैं। इतना बड़ा घोटाला होता रहा और किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। चौंकाने वाली बात है कि मामले की जांच भी खाद्य विभाग के अधिकारी कर रहे हैं।

नान करा रहा जांच
मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम (नान) इस घोटाले में वित्तीय गड़बडिय़ों की जांच की जा रही है। निगम के गोदाम से कितना गेहूं-चावल निकला और कितना सोसायटियों को या खुले बाजार में बेचा गया। इससे निगम को कितनी आर्थिक क्षति हुई, इस पहलू पर जांच की जा रही है। इश्यू सेंटर से अनाज निकलते समय किन लोगों की ड्यूटी थी, उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।

इस जांच में हम लोग वित्तिय अनियमितताएं और कर्मचारियों की मिलीभगत के एंगल से देख रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकेंगे।
विकास नरवाल, प्रबंध संचालक, मप्र नागरिक आपूर्ति निगम

आगे की कड़ी को उजागर करने के लिए सबूत एकत्र कर रहे हैं। मंडी से फुटेज मांगे हैं। आरोपियों के पकड़ में आने के बाद ही कुछ जानकारी होगी।
चैन सिंह रघुवंशी, टीआई निशातपुरा

मिलीभगत से तीन गोदामों में होता था डंप

विकलांगों, बुजुर्गों और अनुसूचित जाति के छात्रों को सप्लाई होने वाले गेहूं को कल्याणकारी सोसाइटियों के माध्यम से सप्लाई किया जाता था। मगर विक्की ट्रेडर्स के अयाज अली, मजीद खान, सचिव जामिया इस्लामिया अरबिया मस्जिद तरजुमेवाली और ट्रांसपोर्टर खालिद खान की मिलीभगत से ये गेहूं करोंद मंडी के तीन गोदामों में डंप करा दिया जाता था। कल्याणकारी योजना के गेहूं की हेराफेरी कब से हो रही थी, इस कड़ी और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं इसको लेकर प्रशासन के अधिकारी जांच कर रहे हैं। उनका कहना है कि जल्द ही बड़ा खुलासा किया जाएगा।

बदल देते थे पैकिंग
सरकारी अनाज रखने वाली बोरियों को नष्ट करके अनाज को दूसरी बोरियों में भरा जाता था। इसके लिए अनाज को छनवा-बिनवा कर नई बोरियों में पैक किया जाता था। यह अनाज देश के कुछ राज्यों में ऊंचे दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था।

राशन की नई व्यवस्था
राशन की नई व्यवस्था के तहत अब राशन दुकानों पर पहुंचने वाला खाद्यान्न निगरानी समिति के सामने ही ट्रांसपोर्टर उतारेगा। उसका समिति पंचनामा तैयार करेगी। इसमें दुकानदार की जिम्मेदारी होगी कि उस पंचनामे को खाद्य विभाग में जमा कराए। इसके अलावा अन्य संस्थाएं जो कि नागरिक आपूर्ति निगम से गेहूं उठाती हैं उसका भी पंचनामा बनेगा। उसकी एक कापी संबंधित विभाग के पास तथा दूसरी कापी खाद्य विभाग के पास जमा होगी।

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