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आज सफला एकादशी पर राशि अनुसार करें ये उपाय, मिलेगी तरक्की

सफला एकादशी के व्रत में देव श्री विष्णु का पूजन किया जाता है. जिस व्यक्ति को सफला एकाद्शी का व्रत करना हो व इस व्रत का संकल्प करके इस व्रत का आरंभ नियम दशमी तिथि से ही प्रारम्भ करे. व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए.

मेष राशि-बुधवार को सफला एकादशी पड़ रही है. अगर घर की दरिद्रता दूर करना चाहते हैं तो आप बस एक आसान सा उपाय करिए. इसके लिये आज के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे में गाय के घी का दीपक जलाएं.

वृष राशि-वृष राशि वाले पीले रंग की धातु के लोटे में गंगाजल डालकर, उसमें थोड़ी सी पिसी हुई हल्दी मिलाएं और उसमें एक सिक्का डाल कर अपने ऊपर से सात बार उतार कर बहते पानी में फेंक दें. वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा.

मिथुन राशि-अपने घर की सुख-शांति के लिये और तरक्की के लिये आज सफला एकादशी के दिन रात के समय भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए भजन-कीर्तन करें. कहते हैं एकादशी की रात को जागकर भगवान का ध्यान करने से हजार वर्षों तक की गई तपस्या का फल प्राप्त होता है.

कर्क राशि-आज एकादशी के दिन 5 सुहागिन महिलाओं को बिना नमक का या मीठा भोजन कराएं. वैवाहिक जीवन में सुख बढ़ेगा.

सिंह राशि-किसी भी काम में अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिये आज के दिन भगवान विष्णु की पूजा के समय दो हल्दी की गांठ पूजा स्थल पर रख लें और अगले दिन जब भी उस काम को करने के लिये घर से निकले तो उन हल्दी की गांठ को पीले कपड़े में लपेटकर अपने दायें हाथ की भुजा पर बांध लें. आपका काम जरूर बनेगा.

कन्या राशि-भगवान विष्णु की पूजा के समय चन्दन घिसकर एक कटोरी में रख दें और जब पूजा समाप्त हो जाये तो दोनों हाथों से भगवान को पुष्पांजलि चढ़ाने के बाद उस कटोरी में से चन्दन लेकर अपने बच्चे के मस्तक पर तिलक लगा दें.

तुला राशिअपने बिजनेस में वृद्धि के लिए आज के दिन एक तांबे का चौड़े मुंह वाला कलश लीजिए. अब उस कलश में श्री विष्णु के किसी भी मन्दिर के मुख्य द्वार और गाय के खुर के नीचे की थोड़ी - सी मिट्टी लेकर रख दें. अब उस कलश को अपनी दुकान या ऑफिस के गेट के पास रख दें और नियमित रूप से अपनी दुकान या ऑफिस खोलते समय धूप उस कलश में जलाएं. यह उपाय आपको पंद्रह दिन तक करना है.

वृश्चिक राशिअपने परिवार के सदस्यों की समृद्धि के लिये आज के दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान नारायण को अर्पित करें. जल अर्पित करते समय शंख में कुछ जल बचाकर रख लें और उसे प्रसाद रूप में स्वयं ग्रहण कर लें. आपके परिवार की सुख-समृद्धि बनी रहेगी.

धनु राशिआपके साथ बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लंबे समय तक बना रहे और आपके बच्चे आपका सम्मान करते रहें, इसके लिये आज के दिन पीपल की जड़ में एक लोटा जल चढ़ाएं.

मकर राशिआपकी सारी समस्याएं समाप्त हो जायें और खुशियां आपके घर पर दस्तक दें, इसके लिये आज के दिन पीपल के तीन पत्ते लेकर उन पर लाल रोली से 'ऊँ नमो नारायणाय' लिखकर भगवान नारायण के मन्दिर में चढ़ा दें.

कुंभ राशिआज अगर किसी नये काम की शुरुआत करने जा रहे हैं, तो उसे शुरू करने से पहले गाय को गेहूं के आटे से बनी रोटी पर गुड़ रखकर खिलाएं. आपके काम की शुरुआत अच्छी होगी और साथ ही उसकी तरक्की भी सुनिश्चित होगी.

मीन राशि-मीन राशि वाले आज भगवान नारायण को केसर मिले दूध का भोग लगाएं और शाम के समय घी का दीपक जरूर जलाएं.

"धर्म-संस्कृति" से अन्य खबरें

बसंत पंचमी 2018: विद्या और एकाग्रता की वृद्धि के लिए किया जाता है माता सरस्वती का पूजन

वसंत पंचमी – 22 जनवरी 2018। वसन्त पंचमी पर सभी को शुभकामनाएं। हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना का दिन होता है। इसी उपासना के दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी लिया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा में बाधा आ रही है तो इस दिन मां शारदा की आराधना अवश्य करनी चाहिए। सरस्वती पूजन के बाद सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा और बाद में रति और कामदेव की पूजा करना लाभदायक माना जाता है।

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आज सफला एकादशी पर राशि अनुसार करें ये उपाय, मिलेगी तरक्की

सफला एकादशी के व्रत में देव श्री विष्णु का पूजन किया जाता है. जिस व्यक्ति को सफला एकाद्शी का व्रत करना हो व इस व्रत का संकल्प करके इस व्रत का आरंभ नियम दशमी तिथि से ही प्रारम्भ करे. व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए.

मेष राशि-बुधवार को सफला एकादशी पड़ रही है. अगर घर की दरिद्रता दूर करना चाहते हैं तो आप बस एक आसान सा उपाय करिए. इसके लिये आज के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे में गाय के घी का दीपक जलाएं.

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सर्वपितृ अमावस्या पर इस प्रकार करें सभी पितरों का श्राद्ध

श्राद्ध पक्ष में अमावस्या का बड़ा महत्व है। आश्विन मास की अमावस्या पितरों की शांति का सबसे अच्छा मुहूर्त है। पितरों के शाप से मुक्ति और भविष्य में भी इससे पूरी तरह मुक्त रहने के लिए पितृश्राद्ध किया जाता है। सर्वपितृ अमावस्या अर्थात श्राद्ध-पक्ष के आखिरी दिन किया गया श्राद्ध कर्म हर प्रकार के पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है।

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निर्जला एकादशी आज, करें इन चीजों का दान मिलेगा पुण्य लाभ

आज निर्जला एकादशी है इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे अधिक पुण्यफल दायिनी है, क्योंकि इस व्रत के करने से साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है. इस बार यह एकादशी 5 जून यानि की आज है, इस व्रत में जल का सेवन न करने के कारण ही यह निर्जला एकादशी कहलाती है. पाण्डवों के भाई भीमसेन ने इस एकादशी का व्रत किया था इसलिए यह भीमसैनी एवं पाण्डवा एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है.

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जानिए तिथियों का महत्व क्यों लोग रहते हैं इसके लिए परेशान?

लखनऊ। हिन्दू धर्म के त्यौहार तिथि के अनुसार मनाये जाते है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार एक मास में 30 तिथियॉ होती है। 15 तिथियॉ शुक्ल पक्ष में और 15 तिथियॉ कृष्ण पक्ष में होती है। एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक के काल को अहोरात्र कहा गया है, उसी को एक तिथि माना गया है। ग्रन्थ सूर्य सिद्धान्त के अनुसार पंचागों की तिथियॉ दिन में किसी समय आरम्भ हो सकती है और इनकी अवधि 19 से 26 घण्टे तक हो सकती है। 

प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक अशुभ शुक्ल पक्ष में ये तिथियॉ प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक अशुभ मानी जाती है। इसलिए कि अमावस्या के दिन चन्द्रमा {अस्त} लुप्त होकर शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन शाम के समय थोड़ा सा सूर्यास्त के बाद दिखाई देते हुये शुक्ल पक्ष की पंचमी तक चन्द्रमा की कलायें क्षीण रहने से शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी व पंचमी तिथियॉ अशुभ कही गई है।

अशुभ न होकर मध्यम फल देने वाली पुनः शुक्ल पक्ष की षष्ठी से दशमी तक ज्यों-ज्यों चन्द्रमा की कलायें बढ़ती है त्यों-त्यों षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, व दशमी तिथियॉ अशुभ न होकर मध्यम फल देने वाली कही गई है।

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हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने से मिलती है ये ऊर्जा

अपने भक्तों के हर दु:ख हरने वाले पवनपुत्र मारुतिनंदन को चोला चढ़ाने से जहां सकारात्मक ऊर्जा मिलती है वहीं बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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देवताओं के राजा इंद्र ने भक्त हनुमान पर वज्र से प्रहार किया था इससे उनकी ठुड्डी टूट गई थी। इस कारण उन्हें हनुमान कहा जाता है।

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