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ऑर्डनेंस फैक्ट्री में लगी आग में फटे 26000 बम, स्पेशल टीम ने राख से खंगाले सैम्पल

जबलपुर. खमरिया ऑर्डनेंस फैक्ट्री में शनिवार शाम लगी आग में कुल 26 हजार बम फटे थे। धमाकों की शुरुआत रिजेक्टेड RCL बमों से हुई थी। इसके बाद एंटी-टैंक बमों, 125 एमएम बमों में ब्लास्ट शुरू हुआ। बाद में एंटी-एयरक्राफ्ट बमों की खेप भी चपेट में आ गई। फूटने वाले सभी बम रिजेक्टेड थे। इनमें सबसे ज्यादा 20 हजार RCL बम थे। वहीं, पांच हजार एंटी-एयरक्राफ्ट बम एल-70 और करीब एक हजार टैंक भेदी बम भी फटे। धमाकों के दौरान कोई नहीं था आसपास...

- फैक्ट्री की ट्रांजिट बिल्डिंग में RCL बम करीब 30 साल से रखे हैं। इनके साथ ही रिजेक्टेड टैंक भेदी और एंटी-एयर क्राफ्ट बमों का जखीरा भी रखा था।
- धमाकों के दौरान कोई भी इम्प्लॉई बिल्डिंग के आसपास नहीं था। शुरुआती जांच में पता चला कि धमाकों में ट्रांजिट बिल्डिंग नंबर 845 पूरी तरह तबाह हो गई है।
- पहले कहा जा रहा था कि बिल्डिंग नंबर 316 और 324 में ब्लास्ट हुआ है, लेकिन रविवार को साफ हुआ कि ब्लास्ट मिनी मैगजीन की बिल्डिंग में हुआ। इसकी खास वजह RCL बमों का फ्यूज कटना बताया गया है।

- बताया जा रहा है कि बंदरों या जंगली जानवरों की उछल-कूद या चूहों के फ्यूज काटने के चलते हादसा हुआ होगा।
- पहले RCL बम फ्यूज लगाकर बनाए जाते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते बाद में यह बम बनाने बंद कर दिए गए।
- ऑर्डनेंस फैक्टरी के जीएम एके अग्रवाल के मुताबिक, ब्लास्ट के कारणों की जांच चल रही है। जो रिजेक्टेड बम खत्म करने थे, वही फटे हैं। पूरी रात ऑपरेशन चला। अब स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है। हादसे में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

पुणे से आई स्पेशल टीम ने राख से खंगाले सैम्पल, बिल्डिंग सील
- हादसे के 24 घंटे के अंदर ही पुणे से स्पेशल टीम पहुंच गई है। टीम में शामिल चारों अफसर रविवार को मौके पर पहुंचे। बिल्डिंग नंबर 824 का बारीकी से मुआयना किया।

- राख के सैम्पल लिए। गोला-बारूद के अवशेष भी जुटाए गए। बिल्डिंग नंबर 845 को सील कर दिया गया है। सैम्पल पुणे स्थित लैब में जाएंगे, जिससे हादसे की असल वजह को तलाशा जा सकेगा।
- वैसे क्वालिटी इन्श्योरेंस मिलिट्री एक्सप्लोसिव (क्यूएएमई) के अफसरों के आने की उम्मीद तो सोमवार को की जा रही थी। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम रविवार को ही पहुंच गई।

- इसके बाद टीम ने एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मीटिंग भी की। जानकाराें का कहना है कि एडमिनिस्ट्रेटिव अफसरों से चर्चा के दौरान जांच का पूरा ब्योरा लिया गया, साथ ही हादसे के मुमकिन वजहों पर भी चर्चा की गई है। इस दौरान उन्होंने यह जानना चाहा कि आखिर किन हालात में इस तरह का हादसा हो सकता है।

सिक्युरिटी के मद्देनजर बनाया दायरा
- जिस जगह हादसा हुअा उस पूरे इलाके को जांच के दायरे में लिया गया है। साथ ही, फैक्ट्री एडमिनिस्ट्रेशन ने बिल्डिंग नंबर 845 को सील कर दिया गया है। इस बिल्डिंग के 5 सौ मीटर के दायरे में भी किसी काे आने-जाने की इजाजत नहीं होगी।
- इधर फैक्ट्री एडमिनिस्ट्रेशन ने अपने लेवल पर इस मामले की जांच करने की तैयारी कर ली है। पता चला है कि सोमवार को हाई लेवल टीम बनाई जाना है। इसमें फैक्ट्री के अलावा सेना के अफसर भी शामिल हो सकते हैं। एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि जांच टीम को एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

1993 में ब्लास्ट में 5 की मौत हुई थी
- 27 जनवरी 1993 में भी इस फैक्ट्री में बड़ा हादसा हो चुका है। तब 5 इम्प्लॉइज की मौत हुई थी। वे सभी रिजेक्टेड बम हटा रहे थे। उसी दौरान ब्लास्ट हो गया। उसके बाद से इस बिल्डिंग को सिक्युरिटी के मद्देनजर खतरनाक घोषित कर दिया गया था।

ऐसे होगी जांच-पड़ताल
- सबूत के तौर पर ली गई राख का पुणे की लैब में हाई लेवल टेस्ट किया जाएगा। 
- राख का केमिकल टेस्ट कर यह पता लगाया जाएगा कि हादसे की वजह क्या थी। 
- जानकारों का मानना है कि जिस फैक्टर की वजह से हादसा हुआ, उसके पार्टिकल राख में मौजूद रह सकते हैं।
- बमों के अवशेष से यह जानने की कोशिश होगी कि ब्लास्ट किस वजह से हुआ। 
- शाॅर्ट सर्किट की चिंगारी या दूसरे किसी कारण से ब्लास्ट के हालात को जांचेगी टीम।

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