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सीएम की चेतावनी अफसरों पर बेअसर, दागियों के खिलाफ नहीं होती कार्रवाई

भोपाल। मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निशाने पर भले ही दागी अफसर हों, लेकिन हकीकत ये है कि उनकी चेतावनी का अफसरों पर कोई असर नहीं हो रहा है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। ऑडियो टेप के जरिए कई अधिकारियों की कारगुजारियां सामने आईं पर किसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई।

जबलपुर में पदस्थ रहे आईएफएस अधिकारी व मुख्य वन संरक्षक अजीत श्रीवास्तव एक कार्रवाई को रफा-दफा करने के एवज में 55 लाख रुपए की मांग करते सुनाई दिए थे। दतिया में कलेक्टर रहे प्रकाश जांगरे व कार्यपालन यंत्री आरके सिंघारे के बीच ऑडियो वायरल हुआ। अजाक आयुक्त रहे जेएन मालपानी विभाग के बड़वानी में पदस्थ सहायक आयुक्त श्रोती से रिश्वत की मांग करते सुनाई दिए थे, तब उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा भी कई अफसर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ जांच चल रही है पर नतीजा नहीं आया।

आईएफएस श्रीवास्तव का मामला

लकड़ी व्यवसायी अशोक रंगा और आईएफएस अजीत श्रीवास्तव का एक ऑडियो टेप वॉट्सएप पर वायरल हुआ था। इसके मुताबिक रंगा के बेटे अरुण के ट्रक को सागौन की लकड़ी के साथ गत जुलाई में काल्पी डिपो के पास तत्कालीन सीसीएफ श्रीवास्तव ने पकड़ा व राजसात किया था। आरोप है कि श्रीवास्तव ने रंगा को आठ अलग-अलग स्थानों पर चर्चा के लिए बुलाया। उन्होंने 55 लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। श्रीवास्तव को हटाकर भोपाल वन मुख्यालय में तैनात कर दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मालपानी सेवानिवृत्त, श्रोती निलंबित

रिश्वत के ही एक अन्य ऑडियो में अजाक आयुक्त रहे जेएन मालपानी, विभाग के बड़वानी में पदस्थ सहायक आयुक्त श्रोती को निलंबित कर दिया गया था। मालपानी तो सेवानिवृत्त हो गए। दूसरी तरफ श्रोती के खिलाफ सवा साल बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। आदिम जाति कल्याण विभाग में ही अपर संचालक रहे वार्ष्णेय भी निलंबित चल रहे हैं। उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ में पदस्थापना के दौरान शिक्षक भर्ती में गोलमाल करने का आरोप है। अदालत में चालान पेश होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया था।

दो दर्जन आईएएस के खिलाफ जांच जारी

प्रदेश में इन दिनों दो दर्जन आईएएस अफसरों के खिलाफ विभिन्न् मामलों में आर्थिक अनियमितता और पद के दुरुपयोग जैसे मामलों की जांच चल रही है। ज्यादातर मामले गंभीर अनियमिताओं और जमीन आवंटन से जुड़े हैं। इसके अलावा रिश्वतखोरी सहित भ्रष्ट आचरण के लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू सहित सरकार के पास साढ़े सात हजार से ज्यादा मामले अकिारी, कर्मचारियों के लंबित हैं।

पीके सिंह को राहत की उम्मीद नहीं

वन भू-अभिलेख शाखा में पदस्थ मुख्य वनसंरक्षक पीके सिंह पर मुकुंदपुर सफारी के निर्माण में गड़बड़ी के आरोप हैं। मामले की प्रारंभिक जांच कार्य आयोजना के अपर प्रान मुख्य वनसंरक्षक अरुण कुमार ने की थी। इसमें सिंह पर गड़बड़ी के आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद संरक्षण शाखा के एपीसीसीएफ डॉ. अतुल श्रीवास्तव से विस्तृत जांच कराई गई है। इस मामले में सिंह को राहत मिलने की उम्मीद कम है, क्योंकि सिंह मामले की प्रारंभिक जांच करने वाले अफसर अरुण कुमार के खिलाफ रीवा कोर्ट में प्राइवेट इस्तगासा लगा चुके हैं। उनके इस निर्णय से शासन में बैठे अफसर नाराज हैं।

विवादों में रहे होतगी

अपनी कार्यशैली के कारण हमेशा विवादों में रहे 1994 बैच के आईएफएस विश्वनाथ होतगी वर्तमान में स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसएफआरआई) जबलपुर में पदस्थ हैं। वन मुख्यालय में रहते हुए होतगी ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के साथ मारपीट की थी। इसीलिए उन्हें जबलपुर भेजा है। मामले में उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही हैं। होतगी का रिटायरमेंट अक्टूबर 2025 में है। वे अब तक उप वनसंरक्षक हैं, जबकि इनके साथ के अफसर दो पदोन्न्ति लेकर मुख्य वनसंरक्षक बन चुके हैं।

कोहली की सीआर खराब

मुख्यालय में पदस्थ 1984 बैच के आईएफएस देवेश कोहली की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) खराब है। इस कारण कोहली को पदोन्न्ति नहीं मिली और वे अब तक उप वनसंरक्षक हैं। जबकि इस बैच के दूसरे अफसर अपर प्रान मुख्य वनसंरक्षक बन चुके हैं। कोहली का रिटायरमेंट अगस्त-2019 में होना है।

इनका कहना है

पीके सिंह की रिपोर्ट अभी शासन के पास नहीं आई है। जबकि अजीत श्रीवास्तव का प्रकरण सीएम को भेज दिया है। होतगी और कोहली के मामले में तो केंद्र सरकार को लिख चुके हैं। अब वहीं से कार्रवाई होना है।

– दीपक खांडेकर, एसीएस वन

पांच बार धमकी दे चुके हैं शिवराज

17 दिसंबर 2016 आईएएस सर्विस मीट में कहा था कि जनता के विरूद्ध काम करने वालों के साथ पूरी कठोरता के साथ पेश आएंगे। किसी प्रकार की दया नहीं होगी। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस अपनाएं।

20 अप्रैल 2017 सिविल सर्विस डे पर अफसरों को नसीहत दी थी कि अफसर जनता को कूड़ा समझते हैं। जनता के लिए कुछ नहीं किया तो आपका जीवन बेकार है। लापरवाही हुई तो सख्त कदम उठाया जाएगा।

22 जुलाई 2017 भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बोले थे कि यदि जिले में अविवादित नामांतरण और राजस्व प्रकरण लंबित मिले तो उल्टा टांग दूंगा। कलेक्टरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।

6 सितंबर 2017 रातापानी गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री सचिवालय के अकिारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि जो अधिकारी काम के प्रति संजीदा नहीं हैं, वे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

7 सितंबर 2017 स्वच्छ भारत की कार्यशाला में कहा कि मेरे शब्द भले ही किसी को अच्छे न लगे, लेकिन गड़बड़ी करने वालों को टांग दो। भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

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