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समाज के हर वर्ग का विकास, देश में अव्वल मध्यप्रदेश

  • संजय जैन

मध्यप्रदेश में बीते ग्यारह वर्ष आमजनों के विकास के रहे हैं, ऐसा विकास जो जन अपेक्षाओं के अनुरूप हो। प्रदेश में ऐसा विकास हुआ जिसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचा। समाज का हर वर्ग जिसमें गरीब, कमजोर, किसान, मजदूर, महिला, बजुर्ग, युवा हैं सबने इस विकास को महसूस किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दूरदर्शी नेतृत्व विकास के इस अहसास के पीछे है, जिसने मध्यप्रदेश में विकास का नया अध्याय लिखा है।

मध्यप्रदेश विकास दर के मामले में देश में अव्वल बना। लगातार कई साल से विकास दर दहाई अंक में है। प्रदेश की ऐतिहासिक कृषि विकास दर ने लोगों को चमत्कृत कर दिया। लगातार चार साल से देश को राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार मिल रहा है। मध्यप्रदेश में ऐसी कई कल्याणकारी योजनाएँ इस अवधि में शुरू हुई, जिनकी उपयोगिता को देश-विदेश में माना गया। समाज के हर वर्ग से संवाद के लिये पंचायतों के जरिये प्रदेश में नीतियों और योजनाओं का निर्माण जनता के बीच और उनकी जरूरतों के अनुरूप करने का अद्वितीय प्रयोग किया गया। मध्यप्रदेश की जिन नवाचारी योजनाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है, वे जनता के विभिन्न वर्गों से सम्वाद के लिये की गयी पंचायतों में मिले सुझावों से जन्मी है। बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में की गयी।

आम-जनता की तकलीफों को जानने-समझने की ललक से प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना बनी है जिसमें गरीब की बेटी के विवाह की चिंता की गयी है। लाड़ली लक्ष्मी जैसी क्रांतिकारी योजना शुरू की गयी है, जो ‍बेटी को बोझ नहीं वरदान बनाती है। आगे जाकर इसमें केवल बे‍टियों के माता-पिता को पेंशन देने की व्यवस्था भी की गयी है।

मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना ऐसी योजना है जो गरीब वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा का अवसर देती है। गरीबी के चलते जो बुजुर्ग तीर्थ यात्रा की आस मन में लिये संसार से चले जाते हैं प्रदेश सरकार उनके लिये सभी धर्मों के तीर्थों पर आस्था की रेल भेज रही है। जिससे वह तीर्थ यात्रा की इच्छा पूरी करते हैं। गरीब मजदूरों के लिये मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना बनायी गयी जिनमें मजदूरों के परिवारों के लिये प्रसव सहायता, चिकित्सा सहायता, शिक्षा सहायता जैसी व्यवस्थाएँ की गयी हैं। यह योजना श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में मील का पत्थर है। ऐसी कई योजनाएँ हैं जिनका उल्लेख किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री चौहान खुद किसान पृष्ठभूमि से है इसलिये वे खेती-किसानी की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसी के चलते वे किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण दिलाने जैसी योजना की जरूरत समझकर लागू करते हैं। अब वे इससे आगे जाकर ऋणात्मक दस प्रतिशत पर कृषि ऋण देने की बात कर रहे हैं। इन्हीं कोशिशों से प्रदेश की कृषि विकास दर 24.9 प्रतिशत तक पहुँचती है और प्रदेश को चार बार राष्ट्रीय कृषि कर्मण अवार्ड मिलता है, जिसे वे सहजता से किसानों की उपलब्धि बताते हैं। खेती में सिंचाई का महत्व समझते हुए प्रदेश में लगातार सिंचाई का क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया गया है। वर्षों से अधूरी सिंचाई योजनाएँ पूरी की गयी। किसानों के लिये नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुँचाया गया। सिंचाई की क्षमता ग्यारह साल में साढ़े 7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 40 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गयी है। मालवा को रेगिस्तान बनने से बचाने के लिये नर्मदा-क्षिप्रा लिंक महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो योजना पूरी की गयी हैं, जिसमें नर्मदा का पानी क्षिप्रा में डाला गया है। इस योजना से हजारों गाँवों में सिंचाई के साथ पेयजल की व्यवस्था भी होगी। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ो योजना को साकार करती है।

आम लोगों को सरकारी दफ्तरों से अपने रोजमर्रा के कामों में आने वाली देरी को समझते हुए ही प्रदेश में मध्यप्रदेश में लोक सेवा गारंटी प्रदाय अधिनियम जैसा क्रांतिकारी कानून लागू किया गया। जो सेवा की समय सीमा में मिलने की गारंटी की बात करता है तथा देरी होने पर संबंधित सरकारी कर्मचारी पर जुर्माने की व्यवस्था करता है। इस अनूठे कानून को देश के कई राज्यों ने अपने यहाँ लागू किया है। इस अधिनिमय के लिये मध्यप्रदेश को संयुक्त राष्ट्र संघ का लोक सेवा अवार्ड मिला है। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टालरेंस की प्रतिबद्धता के चलते मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम लागू किया गया है, जिसमें भ्रष्ट शासकीय कर्मियों की संपत्ति को राजसात करने का प्रावधान है।

प्रदेश में हाथठेला रिक्शा चालकों को मालिक बनाने की पहल भी की गयी है। इसी तरह घरेलू कामकाजी महिलाओं के लिये परिचय पत्र और कल्याण योजनाएँ बनायी गयी हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार जैसी योजना है जिसमें युवा उद्यमियों के ऋण की गारंटी राज्य सरकार की ओर से देने की व्यवस्था की गयी है। हाल ही में राज्य सरकार ने नागरिकों की जिंदगी में खुशी लाने के लिये आनंद विभाग का गठन किया है। आनंद विभाग का गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।

जन विकास के इन्हीं सकारात्मक प्रयासों को आम जनता की भरपूर सराहना और प्रतिसाद मिला है। इसी के चलते लोगों ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व वाली सरकार को लगातार चुना। मध्यप्रदेश इस अवधि में पिछड़े राज्यों की श्रेणी से निकलकर विकसित प्रदेशों की पंक्ति में आ गया है और विकास की यह उड़ान अभी थमी नहीं है, सतत जारी है।
 

 

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